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हिंदी कविता- “सिपाही की कहानी”

सब के साथ वो पला-बढ़ा, खेला-कूदा और पढ़ा,
फिर जवान रहने की उसने ठानी, सुनो सिपाही की कहानी ।

मुश्किल उसने राह चुनी, हृदय की उसने चाह सुनी,
था बड़ा कठोर उसका निर्णय, माँ-बाप के ‘ना’ का था भय ।

हर रोज परीक्षा होती है, मन को भरपूर टटोलती है,
होती है हलचल सरहद पर, और मौसम बदलता है घर पर ।

हर विघ्नों से वो टकराता है, गिर आप खड़ा हो जाता है,
रणभूमि में मुकाबले से पहले, वो स्वयं को युद्ध में पाता है ।

फिर एक रोज वास्तविक रण में, घनघोर, विकट, प्रतिकूल क्षण में,
वो शौर्य का परिचय देता है, आखिर वो दल का नेता है ।

फिर अंतिम उसने सांस लिया, और वीरगति को प्राप्त किया,
उस दिन दुनिया उसे पहचानी, सुनो सिपाही की कहानी ।

-पारिजात भारद्वाज

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