मिग 21 और एफ 16 के बीच जंग

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आलेख : सारंग थत्ते .. 28 फरवरी को भारतीय वायुसेना के मिग-21 बाइसन लड़ाकू जहाज़ ने पाकिस्तान के एफ-16 जहाज़ को मार गिराया था. यह ऐतिहासिक कार्रवाही रही है जिससे एफ-16 बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन को भी सोचने पर मजबूर किया है क़ी हुआ क्या था ? विश्व में एफ-16 लड़ाकू जहाज़ की अपनी एक अलग पहचान है. यह उत्तम प्रोद्योगिकी का बनाया हुआ पाँचवी पीढ़ी का जहाज़ है और इसे तीसरी पीढ़ी के इंटरसेपटर ने मार गिराया, यह बात समझ के बाहर मानी जा रही है.

इतिहास में मिग-21 और एफ-16 के बीच पहले भी लड़ाई हो चुकी है. 14 जुलाई 1981 को इजराइल के मिग लड़ाकू जहाज़ ने ए ए एम ( एंटी एयर क्रॅफ्ट मिसाइल ) दाग कर एफ-16 को बेका घाटी और ऑसिराक आक्रमण में मार गिराया था. इसके अलावा जून 1982 में इजारइल एयर फोर्स ने ऑपरेशन पीस फॉर गालिली में कई एफ-16 मार गिराए थे. 2004 में भारतीय और अमेरिकी वायुसेना के बीच हुए युद्ध अभ्यास में मिग-21 जहाज़ ने एफ सीरीज़ के लड़ाकू जहाज़ को हराया था. तेरह दिन की ग्वालियर में हुई एक्सरसाइज कोप इंडिया में यह कारनामा कर दिखाया था.

भारतीय वायुसेना का सोवियत रूस की लड़ाकू हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी मिकोयन एंड गुरेविच डिजाइन ब्यूरो से मिग युद्धक जहाज निर्माण का सिलसिला अगस्त 1962 में शुरू हुआ. हमने पहली बार रूस के साथ सहयोग के लिए समझौते पर दस्तख़त किए थे. दो महीने बाद भारतीय वायुसेना के सात पायलट और 15 इंजीनियर अक्तूबर 1962 में रूस पहुँचे थे. यह वह दौर था जब हम चीन के साथ जंग में उलझे हुए थे. मिग-21 की उड़ान काबलियत में एक बेहद बड़ी कमी पायी गयी हैं – उड़ान भरने और वापस लॅंडिंग करते समय इस लड़ाकू हवाई जहाज की गति 340 किलोमीटर प्रति घंटा होती हैं जो विश्व में सबसे तेज है. भारतीय वायुसेना के चर्चित मिग सुपरसोनिक लड़ाकू हवाई जहाज अब धीरे-धीरे रिटायर किए जा रहे हैं. पुराने हो चुके इन जहाजों के हिस्से पुर्ज़े और रखरखाव में कमी देखी गयी हैं. मीडिया ने मिग21 जहाज के दुर्घटनाग्रस्त होने की बढ़ती संख्या की बनिस्पत इसे `फ्लाइंग कोफिन’, अर्थात उड़ता ताबूत नाम दे डाला हैं.

हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स में निर्माण

1964 में हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स ओझर, नासिक में एयरक्राफ़्ट डिवीजन की स्थापना हुई जहां बाद में मिग21 एफएल लड़ाकू जहाज निर्माण शुरू हुआ था. इसी संयंत्र में मिग के सभी प्रकार अर्थात मिग21 ई7एफएल, एम, बिस, मिग27 एम का रखरखाव और ओवरहाल किया जाता रहा हैं. अब तक इस संस्थान ने 1800 से ज़्यादा लड़ाकू जहाज का ओवरहाल किया हैं एवं विदेशी जहाजों की भी मरम्मत हो रही है. कालांतर में इस संस्थान ने मिग-21 के विभिन्न संस्करण को अपग्रेड भी किया. 1972 में भारतीय वायुसेना के पास 9 स्क्वाड्रन मिग-21 लड़ाकू हवाई जहाज मौजूद थे (स्क्वाड्रन में 18 से 20 जहाज होते हैं). 1971 की भारत-पाक जंग में हमने छः मिग-21 जहाज खो दिए थे. उस समय के मिग में एक बड़ी खामी थी कि इस जहाज में केनेन नही थी.1974 में आर-13 इंजन के साथ नये मिग-21 एम (टाइप 96) का निर्माण शुरू हुआ और एफएल टाइप का निर्माण बंद हुआ. 70 के दशक के अंत तक भारतीय वायुसेना में 220 मिग-21 मौजूद थे.

इसके बाद 1980 के साथ शुरू हुआ 300 मिग-21 बिस का निर्माण. 1985 तक मिग-21 बिस का निर्माण जारी रहा और फिर शुरू हुआ मिग-27. अब हम कह सकते हैं कि मिग-21 के निर्माण / आयातित जहाज की कुल संख्या लगभग 900 हो गयी थी. 1996 में मिग-21 बिस जहाज को उन्नत बनाए जाने के लिए अपग्रेड कार्यक्रम को हरी झंडी मिली, 125 जहाज इस समझौते में शामिल हुए थे. यह कांट्रॅक्ट रूस की कंपनी को दिया गया था. जहाज के लगभग सभी संयंत्रों में बदलाव लाने की जरूरत को पूर्णता दी गयी थी. काफी मशक्कत के बाद सितंबर 2000 में 125 मिग-21 बिस का अपग्रेड पूरा किया जा सका.

अमेरिकन जनरल डायनामिक्स

अमेरिकन कंपनी जनरल डायनामिक्स ( अब लॉक हीड मार्टिन ) व्दारा बनाया गया पहला मल्टी रोल फाइटर – एयर सूपीरियारिटी फाइटर की परीक्षण उड़ान 20 जनवरी 1974 को हुई थी और अधिकारिक तौर पर 2 फ़रवरी को इसकी सफल उड़ान की घोषणा की गयी थी. एफ-16 को ‘फायटिंग फ़ाल्कन’ नाम से पुकारा जाता है. इसके कई मॉडेल बने है जिन्हे एफ-16ए, बी, सी, डी श्रेणी में नामकरण किया गया है. इसकी कीमत 19 मिलियन अमेरिकी डॉलर है. अब तक 4600 से ज्यादा लड़ाकू एफ-16 विभिन्न मॉडेल में बन चुके है.

दरअसल अमेरिका के विएतनाम युद्ध में इस बात की जरूरत महसूस की थी कि हवा से हवा में आपसी लड़ाई के लिए छोटा और दमदार लड़ाकू जहाज अमेरिका को अपनी वायुसेना में शामिल करना चाहिए. जिसमे तेजी से घूमने की शक्ति हो एवं गति पकड़ने में में कम समय लगे और आवाज़ की गति से तेज इसकी चाल हो – सूपर सोनिक. 1974 के शुरूवाती दौर में अमेरिका को अपने पुराने हो चले एफ-105 थंडर चीफ़ और एफ-4 फॅंटम को बदली करने का दबाव बन पड़ा था. पहले सिर्फ़ 8 एफ-16 लड़ाकू जहाज़ का निर्माण किया गया जिसमे 6 सिंगल सीटर और 2 डबल सीटर थे. इनका निर्माण फोर्ट वर्थ टेक्सस में हुआ था. अमेरिकी वायुसेना के लिए बनाए गये एफ-16ए का पहला लड़ाकू जहाज 20 अक्तूबर 1976 में हवा से बाते कर रहा था. 6 जनवरी 1979 को नये जहाजों को अमेरिकी वायुसेना ने अपनी वायुसेना के लायक स्वीकृति दे दी थी. 34 वें टेकटिकल फ़ाइटर स्क्वाड्रन में 21 जुलाई 1980 को फायटिंग फाल्कन नाम से शामिल किया गया था.

मिग 21 विरुद्ध एफ 16

मिग 21 लड़ाकू जहाज 65 साल पुराने डिजाइन का जहाज़ है. एफ-16 की लंबाई 15.06 मीटर है जबकि मिग-21 14.5 मीटर लंबा है. एफ-16 की चौड़ाई 9.96 मीटर है, मिग की चौड़ाई 7.154 मीटर है. वजन 19.2 टन जबकि मिग का वजन 8.9 टन है. लड़ाकू जहाज में पंखों और फ्यूजलाज ( तलहटी के नीचे ) बम, रॉकेट या मिसाइल ले जाने के लिए जगह बनी होती है. एफ-16 में 9 जगह है जहाँ वेपन ले जा सकते है. 6 पंखों के नीचे, 2 पंखों के अंतिम छोर पर और एक फ्यूजलाज पर. इसके अलावा एफ-16 मे एक 20 एमएम की एम6 1ए1 वालकन केनेन होती है. इसके अलावा मुख्य मिसाइल एमराम है. जबकि मिग-21 बाइसन में डबल बेरेल की 23 एमएम की जी एसएच-23 गन है. मिग लड़ाकू जहाज़ में सिर्फ़ चार वेपन लोडिंग पॉइंट होते है. मिग आर-73 मिसाइल का इस्तेमाल करता है.

अब अमेरिका अपनी वायुसेना के लिए नये एफ-16 नही ले रहा है लेकिन उसके पास मौजूद उन्नत किस्म के एफ-16 अब भी उड़ान भरने के काबिल है. मिग-21 बाइसन की एक बार ईंधन भरने के बाद उड़ान भरने की रेंज 1210 किलोमीटर है जबकि एफ-16 को हम एक बार में 4220 किलोमीटर तक ले जा सकते है. अधिकतम गति 2414 बनाम 2175 किलोमीटर प्रति घंटा है. अधिकतम उँचाई में मिग 17.8 किलोमीटर और एफ 16 15.24 किलोमीटर की उँचाई तक पहुँच सकता है. एफ-16 प्रति मिनिट 17,678 मीटर उँचाई हाँसिल करता है जबकि मिग 15,240 मीटर की उँचाई पकड़ पाता है.

सही माइने में एफ-16 की प्रोद्योगिकी के अनुसार उसका मुकाबला एफ-104, एफ-5 या मिराज 3 से किया जाना चाहिए. जबकि एफ 16 के समानांतर प्रोद्योगिकी का मिलाप मिग 29, मिराज 2000 या पनाविया टॉर्नेडो से किया जा सकता है. लगभग 50 साल का इतिहास रहा इस किस्म के मिग-21 लड़ाकू जहाज के साथ. जनवरी 2017 में राजस्थान के उत्तरलाई वायुसेना अड्डे से एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने अकेले मिग-21(टाइप 96) जहाज को उड़ाया था. लेकिन अब भारतीय वायुसेना के इतिहास में विंग कमांडर अभिनंदन के नाम पाकिस्तानी एफ-16 को मार गिराए जाने का कारनामा स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा.

( चित्र : इंटरनेट से साभार )

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