विश्व की प्रमुख खुफिया एजेंसियां

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आलेख : सारंग थत्ते

किसी भी देश के लिए आंतरिक और बाहरी खतरों के बारे में पूर्व जानकारी होना बेहद जरूरी है. देश की सेना इस कार्य के लिए शायद पर्याप्त नही होगी, इसीलिए एक अलग विभाग इस दायरे में काम करता है. यह काम खुफिया एजंसियों के जिम्मे दिया जाता है. इन्ही खुफिया तंत्र का विश्वसनीय तरीके से कार्य पद्धती को लगातार अंजाम देने की बदौलत ही देश की सुरक्षा मजबूत होती है. इस कार्यवाही में जानकारी का संग्रह, दूसरे देशों में जासूसी करना, अपने देश की सरकार को सुरक्षा संबंधी लिए जाने वाले जरूरी कदमों के बारे में आगाह करना, जरूरी होने पर गलत और झूटी खबरों को फैलाना या राष्ट्रीय हित में चुने हुए व्यक्तियों को जान से मारना शामिल है. विदेश में रहते हुए अपने कार्य को करना खतरे से भरा हुआ हमेशा होता है. लेकिन इसी दायरे में सबसे ज्यादा ताकत होती है, क्योंकि उस देश के बारे में सच्ची जानकारी वहाँ जा कर ही मालूम पड़ती है. विश्व के चुनिंदा खुफिया एजंसियों के के काम, सफल ऑपरेशन एवं भीतर की जानकारी अबकी बार !

मोसाद (इजराइल)

विश्व में इस अंतराष्ट्रीय खुफिया एजंसी को पितामह का दर्जा दिया जाता है. इसे प्रमुखता से माना जाता है और यह विश्व में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. आज भी इजराइल जैसे छोटे देश की पहचान और विश्व में बनी हुई साख इसी जासूसी तंत्र की वजह से है. एक समय था जब मोसाद के सभी जासूस इजराइली सेना से लिए गये थे.

विश्व युद्ध में नाजी युद्ध अपराधियों की धरपकड का काम दिया गया था. इसमे कार्यरत कर्मचारियों को इजरायली भाषा में काटसा कहकर पुकारा जाता है. मध्यपूर्व के ज्वलंत वातावरण में मोसाद ने बरसों काम किया है. एक जानकारी के अनुसार यूरोप और मध्य पूर्व में मोसाद के लगभग 50 एजेंट मौजूद है. इसकी वेबसाइट पर यदि आप जायें तो बड़े ही दोस्ताना अंदाज में यह नयी भरती के लिए सब को आमंत्रित करती है. इस संस्था का प्रशिक्षण केंद्र मिद्राषा में है जो इजराइल के हेर्ज़लीया शहर के नज़दीक है. यहाँ तीन वर्ष का प्रशिक्षण एक खुफिया एजेंट को बनाने में लग जाते हैं.

मोसाद को 1949 में स्थापित किया गया और पूर्ण रूप से 1951 में कार्यशील बन गयी यह खुफिया संस्था. एंटेबे के आक्रमण में मोसाद ने अभूतपूर्व सफलता हाँसिल की थी. युगांडा के राष्ट्रपति ईदी अमीन के डुप्लिकेट से लेकर पूरे गाड़ियों के काफिले को कॉपी किया था और सभी इजरायली बंधकों को सकुशल लाने में सफल हुए थे. 1971 में म्यूनिक ओलंपिक में इजरायली टीम के 11 सदस्यों का कत्लेआम ब्लैक सेप्टम्बर नामक आतंकी गुट ने किया था. इस गुट के सभी सदस्यों को मोसाद के एजेंटो नें ढूंढकर मार डाला था और सही अर्थो में देश का गौरव बढ़ाया था.

सी आई ए ( अमेरिका )

सी आई ए अर्थात सेंट्रल इंटेलीजेंस एजंसी, अमेरिका की खुफिया विभाग का नाम है जिसने पूरे विश्व के कई शहरों में अपनी मौजूदगी दर्ज की हैं. यह कहा जा सकता है कि इसी जासूसी संस्था की वजह से अमेरिका पूरे विश्व में अपना दबदबा कायम रखने में सफलता हाँसिल करता रहा है. वर्जीनिया के शहर फेयरफॅक्स में इसका मुख्यालय मौजूद है. सुपर पॉवर का तमगा मिलने में सीआईए का बड़ा हाथ है. ओसामा बिन लादेन का पाकिस्तान में होना और उसका खात्मा करने में इसी खुफिया दल का मजबूत सहयोग रहा था. सीआईए को ग्वाटेमाला की सरकार का तखतापलट करने में भी सफलता मिली थी.

सीआईए प्रमुखता से विदेशो में होने वाले घटना क्रमों पर नज़र रखती है जिसका सीधा सीधा असर अमेरिका की सरकार या बाशिंदों पर पड़ेगा. 1947 में स्थापित, यह सबसे पुरानी खुफिया एजंसी है. सीआईए को दूसरे देशों में अर्ध सैनिक बलों व्दारा गुप्त ऑपरेशन करने में कई बार सफलता मिली है. आतंकवाद, न्यूक्लियर हथियार और जन संहार करने वाले हथियारों की खोज खबर लेने की भी कई दस्ताने जुड़ी हुई है. इसके अलावा सीआईए अमेरिका में दूसरे देशों के जासूसों के विरोध में भी अपनी कार्रवाही करता आया है. दूसरे देशों में साइबर युद्ध में भी सीआईए को महारत हाँसिल है. इस संस्था की कार्य पद्धति में कई कमियाँ पाई गयी है एवं कार्यशैली के आधार पर यह संस्था विश्व की दर्जेदार नंबर एक जासूसी संस्था का तमगा हाँसिल नही कर पाई है.

विदेशी खुफिया सेवा ( रशिया )

रूस की खुफिया एजंसी को रूसी भाषा में स्लूजबा वनेशने रजवेदिकी – एस व्ही आर के नाम से जाना जाता है. रूसी खुफिया एजंसी एसव्हीआर दरअसल केजीबी का ही हिस्सा है. रूस की सेना के अंतर्गत कार्यशील मिलिटरी विदेशी इंटेलीजेंस एजंसी के साथ काम करती है. एसव्हीआर का मुख्य काम विदेशी धरती पर काम करना है. जासूसी, इलेक्ट्रॉनिक टोह लेने के लिए कार्यवाही में इस संस्था की अहम भूमिका है. मॉस्को के यासेनेओ जिले में इस संस्था का मुख्यालय है. इंटरनेट पर झूटी जानकारी का वर्चस्व बढ़ने में मॉस्को को पूरे नंबर दिए जा सकते है. रशिया और चीन की दोस्ती की वजह से दोनो देशों के खुफिया यंत्र तंत्र मिलकर काम करते है यह सबको विदित है. एसव्हीआर की तरफ से हर दिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक ब्रीफ भेजा जाता है, जिसमे पॉलिसी में बदलाव की जरूरत भी बयान की जाती है.

सीक्रेट इंटेलीजेंस सर्विस (एसआईएस )

ब्रिटेन की विदेशी जासूसी करने वाली संस्था है सीक्रेट इंटेलीजेंस सर्विस, जिसे मिलिटरी इंटेलीजेंस विभाग 6 ( एमआई-6 ) के नाम से भी जाना जाता है. जुलाई 1909 में एमआई 6 का गठन हुआ था और 1920 में इसका नाम बदल कर एसआईएस रखा गया था. जेम्स बांड की अनेक फिल्मों में एसआईएस का जिक्र है. ब्रिटेन के भीतर की हलचल पर नजर रखने के लिए एमआई 5 विभागीय संस्था हैं. ब्रिटेन भी एक लंबे समय से आतंकवाद से लड़ भिड़ रहा है. आतंक के विरोध में कार्रवाही करना, न्यूक्लियर हथियारों के खिलाफ, साइबर सिक्यूरिटी के लिए खुफिया जानकारी जुटाना, विदेशों में आतंक की रोकथाम इत्यादि अहम विषय एमआई-6 के खाते में आते हैं.

एसआईएस के खुफिया एजेंट अमेरिका में 9 / 11 के आक्रमण के बाद 2001 में अफगानिस्तान में मौजूद थे. स्पेशल एयर सर्विस – एस ए एस की एक रेजीमेंट ने एसआईएस के लोगों को अफगानिस्तान में सुरक्षा कवच प्रदान किया था. एसआईएस पर यह भी कहा जाता है की इराक पर 2003 में हुए आक्रमण के दौर में एसआईएस ने एक ख़ुफ़िया ऑपरेशन – मास अपील जिसमे इराक में सामूहिक विनाश के हथियार होने की खबर को कहानी बना कर विश्व में पेश करना शुरू किया था. यह वाकई में एक तरह का झूठा प्रचार प्रसार था. इराक के बाद एसआईएस की नजर पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर बनी हुई है. 2016 में एसआईएस की पहुँच लीबिया के गृह युद्ध में भी देखी गयी थी. इसी खुफिया विभाग ने विशेष रूप से यमन में ड्रोन आक्रमण के काम को अंजाम दिया था. इस संस्था का मुख्यालय लंदन में वौक्सहॉल ब्रिज के पास है, इस बिल्डिंग के कुछ हिस्से जेम्स बॉन्ड की फिल्मों में दिखाए गये है. 20 सितंबर 2000 को इस संस्था के मुख्यालय पर आइरिश रिपब्लिकन आर्मी ने आरपीजी का इस्तेमाल कर आक्रमण किया गया था.

संघीय खुफिया सेवा ( जर्मनी )

जर्मनी का विदेशी जासूसी का जिम्मा लिए हुए है यह संस्थान 1956 से कार्यरत है. इसके जिम्मे मिलिटरी और असैनिक खुफिया जानकारी जुटाने की जिम्मेवारी है. जर्मनी को किसी भी खतरे से बचाने के लिए इस एजंसी को काफी मजबूती दी गयी है. आतंकवाद, न्यूक्लियर हथियार और अन्य खतरनाक हथियारों पर अपनी कड़ी नजर बनाए रखने की जवाबदारी है. इसके अलावा नशीली दवा और गैर कानूनी रूप से रहने वाले प्रवासियों पर रोकथाम करने का जिम्मा भी इसी संस्था को सौंपा गया है. जर्मन भाषा में इस संस्था को बी एन डी कहा जाता है. मुख्य रूप से सभी संदेशों को खंगालने और बातचीत की चैनल पर नियंत्रण रखने का बीड़ा इस संस्था ने उठाया हुआ है.

इन पाँचों खुफिया एजंसियों के अलावा विश्व में जो अन्य प्रमुख संस्थाए है उनमे – पाकिस्तान की आई एस आई, भारत की रॉ, चीन की एम एस एस, रशिया की जी आर यू, ऑस्ट्रेलिया की ए एस आई एस और फ्रांस की डी जी एस ई भी शामिल है.

विश्व की सभ्यता में राजा महाराजाओं के जमाने से राजनय का एक अभिन्न अंग है – जासूसी. देश में मौजूद जासूसों की भी जासूसी में अब इजाफा हो रहा है वहीं कुछ देशों में मौजूद जासूस अपने देश के बर्खिलाफ बोलने और देश छोड़ने को भी तैयार है. कहीं ना कहीं यह खेल जीवन – मृत्यु की कगार पर आकर रुक जाता है. इतिहास में कई उदाहरण है जिसमे जासूसों को मौत के घाट उतारा है और उस कृत्य का नामो निशान नही मिला. फिर भी जब तक राष्ट्रों में आपसी रंजिश, जमीन या सत्ता हथियाने का प्रयास, राष्ट्रीय ध्येय, आपसी धोका और शक कायम रहेगा तब तक देशों के बीच जासूसी का दौर अनवरत चलता रहेगा.

( लेखक सेवा निवृत्त कर्नल है )

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