नाटो गठबंधन के 70 साल

Nato-1024 A.jpg

आलेख : सारंग थत्ते //

नार्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन – नाटो, एक सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 04 अप्रैल 1949 को हुई थी.

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सोवियत संघ ने पूर्वी यूरोप से अपनी सेनाएँ हटाने से इंकार कर दिया और वहाँ साम्यवादी शासन की स्थापना को बल दिया था. अमेरिका ने इसका लाभ उठाकर साम्यवाद का विरोध किया. यूरोपीय देशों के बीच इस पर मतभेद उभरे और आखिर यूरोपीय देश एक ऐसे संगठन के निर्माण हेतु तैयार हो गए जो उनको सुरक्षा प्रदान कर सके. इसके अलावा विश्वयुद्ध के दौरान पश्चिम यूरोपीय देशों ने जबरदस्त नुकसान उठाया था, अतः उनके आर्थिक पुननिर्माण के लिए अमेरिका की ओर सबकी निगाहे बनी हुई थी. ऐसे में अमेरिका व्दारा सुझाए हुए एक नये संघटन की स्थापना का सबने समर्थन ही किया था. संयुक्त राष्ट्र से युद्ध के बाद कोई विशेष मदद मिलने की संभावना नही के बराबर ही थी.

मुख्य उद्देश्य

मार्च 1948 में ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैण्ड तथा लक्सेमबर्ग ने बूसेल्स की संधि पर हस्ताक्षर किए. इसका उद्देश्य सामूहिक सैनिक सहायता व सामाजिक – आर्थिक सहयोग था. साथ ही संधिकर्ताओं ने यह वचन दिया कि यूरोप में उनमें से किसी पर आक्रमण हुआ तो शेष सभी चारों देश हर संभव सहायता देगे.

मुख्य रूप से उत्‍तरी एटलांटिक संधि संगठन (नार्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन – नाटो) एक सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 04 अप्रैल 1949 को हुई थी. इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है. संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अनुच्छेद 15 में क्षेत्रीय संगठनों के प्रावधानों के अधीन उत्तर अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे. नाटो के गठन के शुरुआत के कुछ सालों में यह संगठन सिर्फ़ एक राजनीतिक संगठन से अधिक कुछ नहीं था. लेकिन 1950 में शुरू हुए कोरियाई युद्ध ने सदस्य देशों को चिंता में डाल दिया और फिर अमेरिका के दिशानिर्देशन में एक एकीकृत सैन्य संरचना को बनाने की बात पर सभी देशों ने साथ दिया और नाटो ने अपना रूप बदला. संधि प्रावधानों के अनुच्छेद 5 में कहा गया कि संधि के किसी एक देश या एक से अधिक देशों पर आक्रमण की स्थिति में इसे सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों पर आक्रमण माना जाएगा और संधिकर्ता सभी राष्ट्र एकजुट होकर सैनिक कार्यवाही के माध्यम से एकजुट होकर इस स्थिति का मुकाबला करेंगे. नाटो गठबंधन ने 9/11 हमलों के बाद अपने इतिहास में पहली बार अनुच्छेद 5 को लागू किया था.

सदस्य देश

शुरूवात में बनाई गयी संरचना पर 12 देशों ने हस्ताक्षर किए थे. नाटो के संस्थापक देश थे – फ्रांस, बेल्जियम, लक्जमर्ग, ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा, डेनमार्क, आइसलैण्ड, इटली, नार्वे, पुर्तगाल और संयुक्त राज्य अमेरिका. शीत युद्ध की समाप्ति से पूर्व यूनान, टर्की, पश्चिम जर्मनी, स्पेन भी इसके सदस्य बने तथा शीत युद्ध के बाद भी नाटों की सदस्य संख्या का विस्तार होता गया. 1999 में अमेरिका में मिसौरी सम्मेलन में पोलैण्ड, हंगरी, और चेक गणराज्य के इस संघटन में शामिल होने से इसकी सदस्य संख्या 19 हुई थी. इसके बाद मार्च 2004 में 7 नए राष्ट्रों को इसका सदस्य बनाया गया.

अब नाटो के 29 सदस्य देशों में से दो उत्तरी अमेरिका (कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका) में स्थित हैं, 26 यूरोप में हैं, और एक यूरेशिया (तुर्की) में है. आइसलैंड को छोड़कर सभी सदस्यों के पास सेना हैं, लेकिन आइसलैंड के पास एक तट रक्षक और नाटो के संचालन के लिए नागरिक विशेषज्ञों की एक छोटी इकाई है. नाटो के तीन सदस्य – फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका परमाणु हथियार वाले राज्य हैं. नाटो का सबसे नया तीसवां सदस्य, उत्तर मैसेडोनिया, इस साल के अंत में या अगले साल की शुरुआत में सदस्यता की प्रक्रिया को पूरा करेगा.

शीतयुद्ध के बाद नाटो

नाटो की स्थापना के बाद विश्व में और विशेषकर यूरोप में अमेरिका तथा तत्कालीन सोवियत संघ इन दो महाशक्तियों के बीच खतरनाक मोड़ लेने लगा और नाटो का प्रतिकार करने के लिए पोलैण्ड की राजधानी वार्सा में पूर्वी यूरोप के समाजवादी देशों के साथ मिलकर सोवियत संघ ने वारसा पैक्ट की स्थापना की थी. 1990 – 91 में सोवियत संघ के विघटन के साथ ही शीतयुद्ध की भी समाप्ति हुई. वार्सा पैक्ट भी समाप्त हो गया, किंतु अमेरिका ने नाटों को भंग नहीं किया बल्कि अमेरिकी नेतृत्व में नाटों का और विस्तार ही हुआ था. इसी बिन्दु पर यह सवाल उठता है कि शीतयुद्ध कालीन दौर में निर्मित इस संगठन का शीत युद्ध के अंत के बाद मौजूद रहने का क्या औचित्य हैं ?

सेना की तत्परता

नाटो अपनी 70 वीं वर्षगांठ को मनाने की तैयारी कर रहा है. इस अवसर पर महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि गठबंधन कई बार बदल सकता था, लेकिन इसने अपने मूलभूत सिद्धांत से समझौता नहीं किया है : एक दूसरे की रक्षा और बचाव के लिए अपने सदस्य देशों की प्रतिबद्धता कायम रखी है. स्टोलटेनबर्ग ने कहा, नाटो फिर से बदल रहा है, और एक अधिक जटिल और अप्रत्याशित दुनिया का सामना कर रहा है. नाटो इतिहास में सबसे सफल गठबंधन है. इस सदी में सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करते हुए, नाटो देश अपनी सेना की तत्परता बढ़ा रहे हैं, सामूहिक रक्षा में अधिक निवेश कर रहे हैं और गठबंधन को आधुनिक बना रहे हैं.

07 जून 2018 को नाटो सदस्य देशों ने एक नयी पहल को तवज्जो दिया था – इसके तहत 2020 तक नाटो की ताकत में इज़ाफा किया जाएगा – 30 बटालियन सैनिक, 30 युद्धक समुद्री पोत, 30 हवाई जहाज के स्क्वाड्रन और 30 दिन के भीतर इस्तेमाल की पहल की जाएगी. प्रत्येक नाटो सदस्य देश लागत – शेयरिंग फार्मूले के आधार पर बजट में राशि का भुगतान करता है. किसी भी सदस्य देश का बजट नाटो देशों के कुल रक्षा बजट व्यय के एक प्रतिशत से भी कम रहता है.

शीत युद्ध की समाप्ति के बाद नाटो और रूस के संबंध शुरू हुए, जब रूस उत्तरी अटलांटिक सहयोग परिषद (1991) और शांति कार्यक्रम के लिए भागीदारी (1994) में शामिल हुआ. दोनों पक्षों ने 1997 में साझेदारी और साझा हित के आधार पर एक स्थिर, सुरक्षित और अविभाजित महाद्वीप के निर्माण के लिए एक साथ काम करने की पारस्परिक प्रतिबद्धता की थी. लेकिन यूक्रेन में रूस के सैन्य हस्तक्षेप के जवाब में अप्रैल 2014 में इस सहयोग को निलंबित कर दिया गया था.

आतंकवाद पर कार्रवाही

12 सितंबर 2001 को, संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ आतंकवादी हमलों के 24 घंटे से भी कम समय में, नाटो ने उत्तरी अटलांटिक संधि के अनुच्छेद 5 की शर्तों के तहत सभी नाटो सदस्य देशों के खिलाफ हमलों को घोषित किया था. अफगान सुरक्षा बलों और संस्थानों के लिए और अधिक प्रशिक्षण, सलाह और सहायता प्रदान करने के लिए 1 जनवरी 2015 को नाटो के नेतृत्व में मिशन शुरू किया गया था. इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आई एस एस एफ) का नेतृत्व 2003 से 2014 के अंत तक नाटो ने किया और एक प्रतिनिधि सरकार और आत्मनिर्भर शांति और सुरक्षा का आनंद लेने के लिए अफगानिस्तान को स्थापित करने में मदद की.

गठबंधन के सैन्य पहलू में भाग लेने वाले सभी सदस्य देश बलों और उपकरणों का योगदान करते हैं, जो एक साथ गठबंधन की एकीकृत सैन्य संरचना का गठन करते हैं. ये बल और संपत्ति राष्ट्रीय कमान के अधीन हैं. नाटो के पास स्वयं के स्वामित्व के एवॅक्स – प्रारंभिक चेतावनी रडार विमान मौजूद हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका नाटो के बजट में तीन-चौथाई योगदान देता है. केवल चार देश सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्रतिशत के लक्षित खर्च तक पहुँचते हैं – संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ग्रीस और एस्टोनिया हैं. नाटो का मिशन अपने सदस्यों की स्वतंत्रता की रक्षा करना है. इसके लक्ष्यों में सामूहिक विनाश, आतंकवाद और साइबर हमलों के हथियार शामिल हैं. इसमे वह काफ़ी हद तक सफल रहा है. सत्तर साल तक 29 देशों के सैन्य संघटन का रहना और ना टूटना अपने आप में विश्व में अपनी छाप छोड़ जाता है.

( चित्र इंटरनेट से साभार )

( लेखक सेवा निवृत्त कर्नल है )

Hits: 17
Do you like the post?
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *