आई एस आई एस की आखिरी जंग

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आलेख : सारंग थत्ते

इस साल के आगाज के साथ आईएस के ठिकानों पर गठबंधन की सेना ने अपना कब्जा करने का दौर शुरू किया था.
अंतिम लड़ाई का दौर बागूज की लड़ाई पर केंद्रित था.
दक्षिण सीरिया में उफ्रेटस नदी के पश्चिमी छोर पर इस छोटे से कस्बे ने कई दिनों तक अमेरिकी और फ्रांस की गोलाबारी को झेला था.

आई एस आई एस – इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड सीरिया (आईएस) का जन्म अल – कायदा के विभाजन के बाद में बनाया गया था. आईएस ने इराक़, सीरिया और इससे आगे भी अपना अधिकार क्षेत्र अर्थात खलीफात या कालीफत को बनाने का प्रण किया था. कट्टरपंथी लोगों के इस जमावड़े में पैसे के खातिर विदेशी लड़ाकों ने भी अपनी दस्तक दी और एक इस्लामिक प्रांत बनाने की कोशिश को खून से रंग दिया.

अब से लगभग साढ़े चार साल पहले सीरिया के एक बड़े हिस्से में आईएसआईएस ने अपने पैर कत्लेआम के साए में जमाए थे. दहशत का वातावरण और ख़ौफ़ ने आम जनता का जीना दूभर हो गया था. इस गुट का मकसद था आठवीं शताब्दी के शरिया क़ानून को समाज पर थोपने का जुनून सवार हुआ था. आई एस ने 21 देशों में अब तक 1400 लोगो को मार डाल है. इसमे क्रूरता से किए गये नर संहार, फाँसी और जनता के सामने सर में गोली मारने से भी नही चुके है आई एस के दरिंदे. आईएस ने सोशल मीडिया और टेलीविज़न तथा प्रिंट मीडिया में अपनी बात को जनता के सामने रखने के लिए नये नये तरीके इजात किए थे. अपने काले झंडे के साए में सीरिया और इराक के बाशिंदे घुटने टेकने को मजबूर हुए थे.

आईएस का फैलाव

आईएस ने 34,000 वर्ग किलोमीटर का इलाका 2014 में सिर्फ हथियारों के बल पर अपने कब्ज़े में किया था. भूमध्य सागर से बगदाद तक अपनी हुकूमत का डंका बजाने में जल्द कामयाबी मिली थी. आईएस की कमाई का जरिया तेल के भंडारों पर कब्जा और उसे बेचने, तस्करी, अपहरण से पैसे की उगाही और खेती पर जबरन टॅक्स वसूल करने की वजह रही थी. कई विदेशी पत्रकारों को अगवा कर या तो गला रेत कर मौत के घाट उतारा या आग में स्वाहा कर दिया था. एक समय आईएस की कुल संपत्ति 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा आँकी गयी थी. फरवरी 2016 में अमेरिका की अगुवाई में मौजूद संघठन सेना ने आईएस का डटकर मुकाबला किया था. इस संघर्ष के बाद लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा आईएस के चुंगल से खाली कराने में सफल हुए थे.

आईएसआईएस के गठन के कुछ ही महीनों में इस खूँखार गुट ने अपने नाम को छोटा करते हुए आईएस (इस्लामिक स्टेट) नाम को आत्मसात कर लिया था. आईएस के मुखिया अबू बक्र अल बघदादी के बारे में ज़्यादा कुछ पता नही लगा था, लेकिन बगदाद विश्वविद्यालय से इस्लामिक स्टडीज़ में डॉक्टरेट हाँसिल किया था. इराक में अल कायदा से जुड़ने से पहले उसने अपने आतंकवादी गुट को सलहएददीन और दियाला प्रांत में मशहूर कर दिया था. 4 फरवरी 2004 को फलूजा के नजदीक बघदादी को अमेरिका ने पकड़ा था. उसे सबसे पहले अबू घारिब और बाद में कैंप बक्का में कैद किया, जहाँ से उसे एक मामूली कैदी की हैसियत से 8 दिसंबर 2004 को मुक्त किया गया. किसी को नही पता था कि यह एक खूखार आतंकवादी बनकर पूरी दुनिया को अपने दायरे में लेने के सपने सॅंजो कर हथियार उठाने के लिए विदेशी लड़ाकों को भी मजबूर करेगा.

2019 का आगाज

इस साल के शुरूवाती महीनों में आईएस के मुखिया अबू बक्र अल बघदादी के गुट में से कई धुरंधर नेता मारे गये. अमेरिकी ने गठबंधन की सेना की अगुवाई में कई देशों की सेनाओं को मिलाकर आईएस से लोहा लेने में एडी चोटी का जोर लगाया था. धीरे धीरे गठबंधन की सेना ने अपने पैर जमाए और कई जगह आईएस को हार देखनी पड़ी थी. लेकिन कई इलाकों में आईएस का गढ़ अब भी मौजूद था.

आई एस के ठिकानों पर गठबंधन की सेना ने अपना कब्जा करने का दौर शुरू किया था. अंतिम लड़ाई का दौर बागुज की लड़ाई पर केंद्रित थी. दक्षिण सीरिया में उफ्रेटस नदी के पश्चिमी छोर पर इस छोटे से कस्बे ने कई दिनों तक अमेरिकी और फ्रांस की गोलाबारी को झेला था. इस लड़ाई को रुक रुक कर आगे बढ़ने के लिए आईएस ने वहाँ के बाशिंदों को ढाल बनाकर अपने सामने कर लिया था. रात में हवाई हमले और दिन मे मशीन गन के फायर के बीच लड़ाकों की फौज गठबंधन की सेना से लड़ रही थी. जिहादी अपने बलबूते पर अपने अधीन वहाँ की आम जनता को वहाँ से पीछे हटने के लिए कहते रहे. लेकिन स्नाइपर फायर के बीच में से निकालने के रास्ते बंद हो चुके थे. धीरे – धीरे आईएस के विदेशी लड़ाकों के हौंसले परास्त हो चुके थे, वह स्वयं के लिए भागने के रास्ते तलाश रहे थे.

बागुज की अंतिम लड़ाई

बागुज पर आक्रमण में एक हिस्सा कुर्द लड़ाकों का भी था जो गठबंधन की तरफ से उत्तरी इलाक़ों के बाशिंदे अपनी पहचान पिछले चार सालों में बरकरार रख चुके थे. जिस तेज़ी के साथ आईएस ने अपने पैर इराक और सीरिया में पसारे थे, उसी तेज़ी के साथ उनका सफ़ाया करने में नाटो गठबंधन देशों के सैनिकों की गोलाबारी अब उन पर भारी पड़ रही थी.

ब्रिटिश अख़बार दी गार्डियन के मुताबिक बागुज की अंतिम लड़ाई में बगदादी जिस छोटे से घर में छुपा था वहाँ मौजूद उसके करीबी लड़ाकों में हुई आपसी कहासुनी के चलते, अल बगदादी को मार दिया गया था गया था. अमेरिका ने घोषणा की थी की आईएस का सफाया हो चुका है. बगदादी मारा गया. इस आतंकी सरगना पर अमेरिका ने 25 मिलियन डॉलर की मोटी रकम इसे मारने या पकड़वाने के लिए रखी थी.

2790 किलोमीटर लंबी महानद नदी (उफ्रेटस) के गलियारे में आईएस के लड़ाके दक्षिण की तरफ पीछे हट रहे थे. इस लड़ाई का अंतिम गढ़ बन था बागुज, जहाँ इस साल जनवरी में गठबंधन और कुर्द लड़ाकों की फौज की कार्रवाही के चलते कई हजार जिहादी घिर गये थे. आतंक के दरिंदों के लिए यह अंतिम किला कहा जा सकता था – उनके लिए मरो या मारो की रणनीति को हर दिन और रात में अमल में लाना जरूरी हो गया था. नये साल के शुरू से ही गठबंधन ने अपना आक्रमण तीव्र कर दिया था. फरवरी 2019 के शुरूवाती दिनों में जमीन और हवाई हमलो ने आईएस की रीढ़ तोड़ दी थी. अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार के संघटन ने इस बात का खुलासा किया था कि लगभग 630 जगहों पर गठबंधन ने हवाई हमलों से जमीन पर गहरे निशान छोड़ दिए थे. बमबारी से जगह जगह बड़े बड़े गड्ढे हो चुके थे – यह सब 19 जनवरी से लेकर 20 फरवरी 2019 के बीच हुआ था. यहाँ से पलायन के अलावा कोई दूसरा चारा नही था. सेटेलाइट से लिए गये चित्रों से यह साफ नजर आता था कि सड़कों पर आवाजाही बेहद ज़्यादा नजर आ रही थी. भागनेवालों में सभी थे आईएस के लड़ाके, उनके व्दारा कैद किए गये आम जन और इलाके के बाशिंदे सभी भयभीत थे – जान जोखिम मे डाल कर सड़कों पर दक्षिण की तरफ गाड़ियों की कतार बढ़ चली थी. न्यूज़ीलॅंड और ऑस्ट्रेलिया से आए हुए आईएस के विदेशी लड़ाके अब अपने हथियार डालने को तैयार थे. बागुज से 10 किलोमीटर दूर स्थापित था जाँच का क्षेत्र – जहाँ सभी को रोका जा रहा था और उनकी असलियत मालूम की जा रही थी. यहीं पर सेना ने लड़ाकों का आत्मसमर्पण स्वीकार किया और लड़ाकों को बंदी बनाया. दरअसल देशी और विदेशी लड़ाकों की कुल संख्या 5000 से उपर है.

अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण

उत्तरी क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों के जनजातीय कुर्द लड़ाकों की फौज की अगुवाई में सिरियन डेमोक्रॅटिक फोर्सस ने दुनिया के देशों से अपील की है कि आईएस के लड़ाकों को, जिन्हे बंदी बनाकर रखा है उनके लिए एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण का गठन किया जाना चाहिए. इसकी जरूरत इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इन आतंकी लड़ाकों के मूल देश की सरकार ने इन्हे वापस लेने से इनकार किया है. अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकारों के नियमों के अंतर्गत इस प्रकार के न्यायाधिकरण को ही फ़ैसला करने की अनुमति होनी चाहिए. ब्रिटेन और फ्रांस ने इस बात को ज़ोर देकर कहा है कि आईएस के लड़ाके जो पकड़े गये है उनके उपर उसी इलाके में न्याय मिलना चाहिए जहाँ उन्होने अपने आतंकी कृत्य किए है. इस किस्म के अंतरराष्ट्रीय आतंकी खून खराबे के लिए न्याय प्रक्रिया इतनी आसान नही होगी. अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण को कई बातों के पुख़्ता सबूत इक्कठे करने होंगे, जिसमे उनके मूल देश से भी जानकारी लेनी होगी. कई मामलों में कोई गवाह ना मिलने के आसार भी नजर आते है. इस वजह से कई मुकदमे खारिज हो सकते है और आतंकवादी बिना सबूतों के छूट जाएँगे – जो मूल देश की जनता के लिए एक खतरा बन सकते है. एक बेहद पेचीदा प्रश्न इस समय इस आई एस की लड़ाई के उपरांत उभरकर सामने आया है. आई एस आई एस की हार के बाद भी विश्व को अभी पूरी तरह से जीत हाँसिल नही हुई है.

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